गंगा सभा के आगे झुकी सरकार मुक्ति योजना पर रोक लगाने के आदेश

Ghughuti Bulletin

हरिद्वार: उत्तराखंड संस्कृत अकादमी और श्री गंगा सभा के बीच मुक्ति योजना को लेकर उपजा विवाद खत्म हो गया है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने उत्तराखंड संस्कृत अकादमी को मुक्ति योजना पर रोक लगाने का आदेश दे दिया है। मुक्ति योजना पर रोक लगने के बाद तीर्थ पुरोहितों की संस्था श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का आभार व्यक्त किया है।
वहीं, संस्कृत अकादमी के सचिव व मुख्य शिक्षाधिकारी आनंद भरद्वाज ने कहा कि संस्कृत अकादमी की मुक्ति योजना सिर्फ प्लानिंग में थी। कहीं भी धरातल पर नहीं थी। उस योजना को संस्कृत शिक्षा मंत्री के आदेशनुसार रोक दिया गया है।

-क्या है मुक्ति योजना

हाल ही में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा एक योजना बनाई गई थी, जिसका नाम मुक्ति योजना रखा गया। इस योजना के मुताबिक, विदेशों में रहने वाले सनातन धर्म के लोगों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने के लिए उत्तराखंड संस्कृत अकादमी ने 100 डॉलर शुल्क निर्धारित किया था। इस प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जानी थी। लेकिन मुक्ति योजना के धरातल पर उतरने से पहले ही हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित इस योजना के विरोध में उतर आए थे।

सीएम धामी से की थी मुलाकात

रविवार को श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून में सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। उन्होंने सीएम धामी को मुक्ति योजना पर रोक लगाने के संबंध में पत्र भी सौंपा था। तीर्थ पुरोहितों की मांग पर सरकार ने मुक्ति योजना पर रोक लगा दी और इस संबंध में मंत्री अरविंद पांडे द्वारा उत्तराखंड संस्कृत अकादमी को आदेश भी जारी कर दिया गया।

गंगा सभा ने जताया आभार

मुक्ति योजना पर रोक लगने के बाद श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों ने सीएम पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का आभार व्यक्त किया है। श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा बनाई गई मुक्ति योजना सनातन धर्म से जुड़ी परंपराओं के विपरीत योजना थी, जिसका उनके द्वारा पुरजोर विरोध किया गया। वह सब सीएम धामी और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने इस योजना पर रोक लगा दी है। इस योजना पर रोक लगाकर सरकार ने सनातनी परंपराओं का सम्मान करते हुए तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों को सुरक्षित भी रखा है।

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